<p style="text-align: justify;"><strong>अहमदाबादः</strong> गुजरात में पहली बार कोरोना वायरस के ‘कप्पा’ वेरिएंट के छह मामले सामने आए हैं. शनिवार को राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने इसकी जानकारी दी. विभाग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि तीन मामले जामनगर में, दो पंचमहल जिले के गोधरा में और एक मामला मेहसाणा जिले में सामने आया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मई में नए म्यूटेंट को ‘‘कप्पा’ ’नाम दिया था.</p> <p style="text-align: justify;">विभाग ने बताया कि इस वर्ष मार्च और जून के बीच कोविड-19 से संक्रमित इन रोगियों के नमूनों की जीनोम सिक्वेंसिंग से पता चला कि वे नए वेरिएंट से संक्रमित हैं. बयान में बताया गया है कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् (आईसीएमआर) के मुताबिक कप्पा ‘‘वेरिएंट ऑफ इंटेरेस्ट’’ है न कि ‘‘वेरिएंट ऑफ कंसर्न’’</p> <p style="text-align: justify;"><strong>केस मिलने वाले इलाकों की निगरानी</strong><br />विभाग ने इन रोगियों के संपर्क में आए लोगों का भी पता लगाया है. इसने कहा, ‘‘अभी तक उनके किसी भी संपर्क में कोविड-19 के लक्षण नहीं पाए गए हैं. जिन इलाकों में ये मामले सामने आए हैं, वहां स्वास्थ्य विभाग ने गहन निगरानी की है.’’</p> <p style="text-align: justify;"><strong>गुजरात में एक्टिव केस की संख्या 342</strong><br />गुजरात में अभी तक कोविड-19 के 8,24,683 मामले सामने आए हैं जिनमें से 8,14,265 रोगी संक्रमण से ठीक हो चुके हैं. राज्य में वर्तमान में उपचाराधीन मरीजों की संख्या 342 है. वहीं, शनिवार सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार देशभर में पिछले 24 घंटों में 39,097 नए कोरोना केस आए और 546 संक्रमितों की जान चली गई है. इससे पहले शुक्रवार को 35,342 नए मामले आए थे. ऐसे देश में लगातार दो दिन कोरोना संक्रमण के 40 हजार से कम नए मामले सामने आए. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें-</strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a href="https://ift.tt/3kSBPEP Monsoon Update: आज से उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में ज्यादा होगी बारिश, महाराष्ट्र-गोवा को मिल सकती है राहत</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a href="https://www.abplive.com/news/india/caste-census-jitan-ram-manjhi-says-when-tigers-and-goats-can-be-counted-why-cant-castes-be-counted-ann-1944821">जातिगत जनगणना: जीतनराम मांझी ने कहा- जब बाघ और बकरियों की गिनती हो सकती है तो जातियों की क्यों नहीं हो सकती?</a></strong></p>
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