<p style="text-align: justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे मंगलवार को पीएम मोदी से मुलाक़ात करने वाले हैं. मुलाक़ात में मराठा आरक्षण, ओबीसी आरक्षण, ताउते तूफ़ान से हुए नुक़सान का मुद्दा उठाएंगे. उद्धव ठाकरे चाहते हैं कि मराठा आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद केंद्र ओबीसी की सूची संशोधन कर उसमें मराठाओ को शामिल करे और पुनर्विचार याचिका में केंद्र पहले की तरह सहयोग जारी रखे.</p> <p style="text-align: justify;">साथ ही उद्धव ठाकरे चाहते हैं कि ताऊते तूफ़ान से हुए नुक़सान की भरपाई के लिए गुजरात की तर्ज़ पर 1000 करोड़ महाराष्ट्र को भी दिया जाए. उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनने के बाद दूसरी बार प्रधानमंत्री से मिलने आ रहे हैं, जानकार इस मुलाक़ात के राजनीतिक मायने भी निकाल रहे हैं.</p> <p style="text-align: justify;">आपको बता दे कि बीजेपी और शिवसेना साल 2019 विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर अलग-अलग हो गए थे, तब शिवसेना 56 विधानसभा सीटें जीत के दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी और और बिजली को 105 सीटें मिली थी. बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी थी. शिवसेना ने तब दावा किया था कि उसी साल हुए लोकसभा चुनावों से पहले तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें 50-50 फॉर्मूले के तहत विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद का वायदा किया था. हालांकि बाद में इस पर सहमति नहीं बनी. जब 50-50 फ़ोरमूले पर सहमति नहीं बनी तो दोनों दल क़रीब 25 साल पुराना साथ छोड़ कर अलग-अलग हो गए. शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिल कर सरकार बनाई और पहली बार ठाकरे ख़ानदान से किसी को मुख्यमंत्री बनाया गया.</p> <p style="text-align: justify;">महाराष्ट्र में सरकार बनने के बाद तक़रीबन डेढ़ साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्धव ठाकरे की फिर से मुलाक़ात हो रही है. शिवसेना के सूत्र इस मुलाक़ात को बेहद ख़ास बता रहे हैं और भविष्य की बुनियाद के लिए भी अहम बता रहे हैं. उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी का कहना है कि शिवसेना और बीजेपी के रास्ते अलग -अलग होने के बावजूद मोदी और उद्धव ठाकरे के संबंध बेहद मधुर बने रहे.</p> <p style="text-align: justify;">शिवसेना के सूत्रों का कहना है राजनीति में कोई भी-कभी भी अछूत नहीं होता है, जाहिर तौर पर भविष्य में ज़रूरत होने पर बीजेपी-शिवसेना फिर से एक साथ आ सकते हैं इस सम्भावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता है लेकिन फ़िलहाल इसकी संभावना नहीं दिखाई दे रही है, और भविष्य में क्या होगा कोई नहीं जानता हैं. लेकिन बड़ा सवाल ये है की क्या वैचारिक धरातल पर समानता रखने वाली और हिंदुत्व की पैरोकार इन दोनों पार्टियों के बीच कुछ पक रहा है और क्या एक बार फिर दोनों एक-दूसरे के क़रीब आ रहे हैं?</p> <p style="text-align: justify;"><a href="https://ift.tt/3pxPfGv Modi Speech Highlights: पीएम मोदी का एलान, सभी देशवासियों के लिए केंद्र सरकार ही मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध करवाएगी | 10 बड़ी बातें</strong></a></p>
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